Coronavirus kya hai

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दोस्तों आज मैं आपको बताने वाला हूं कि कोरोनावायरस क्या है और यह कैसे पैदा हुआ इसकी आज पूरी हिस्ट्री आपको इसमें बताने वाला हूं तो आप बने रहिए हमारे साथ ।

चीन की वुहान लैब में वैज्ञानिक दूसरे वायरस के ऊपर रिसर्च कर रहे थे तब उनकी नजर उनके माइक्रोस्कोप में एक वायरस के ऊपर गई ।

मेडिकल हिस्ट्री में ऐसा वायरस पहले कभी नहीं देखा गया था इसके जेनेटिक सीक्वेंस को गौर से देखने पर पता चल रहा था कि ये चमगादड़ के करीबी हो सकते हैं ।

कोरोनावायरस

वैज्ञानिक हैरान थे  क्योंकि वे इस वायरस में सांस वायरस के साथ समानता को देख रहे थे जिस ने 2002 और 2003 में चीन में महामारी ला दी थी और दुनिया भर में 700 से ज्यादा लोग मारे गए थे उस वक्त यह बताया गया था कि सोर्स  संक्रामक व्यक्ति से तूने या छींकने से फैलता है लेकिन उस समय चीन उस वायरस को छुपा ले गया  और दुनिया के सामने इस वायरस को नहीं आने दिया ।

दिसंबर 2019 के शुरुआती दिनों में

चीन के सी फूड मार्केट के आसपास रहने वाले कई लोग अचानक बुखार से पीड़ित होने लगे इनके टेस्ट के लिए सैंपल लैब में भेजे गए जिसके बाद यह सैंपल वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी नेशनल बायोसेफ्टी लैब के पास पहुंचे ।

यहां पर वैज्ञानिक के माइक्रोस्कोप दिखा रहे थे आने वाले ग्लोबल खतरे का संकेत था लेकिन चीनी अधिकारियों ने डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को बदनामी और अफरातफरी के माहौल से बचने के लिए खामोश करा दिया ।

कोरोनावायरस

दिसंबर के आखिरी सप्ताह में

डॉक्टर ली व लियांग के हॉस्पिटल में स्थानीय सी फूड मार्केट के 7 मरीज पहुंचे

यह वही डॉक्टर ली व लियांग थे जिन्होंने दुनिया को सबसे पहले इसी खतरनाक वायरस से अवगत कराया था।

मरीजों के लक्षण देखकर ही डॉक्टर लि को समझ में आ गया था किए सभी के सभी किसी अनजान घातक वायरस से ग्रसित हो गए हैं ।

उन्होंने फौरन इस बीमारी के बारे में दूसरे डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया और इस वायरस के बारे में अपनी रिपोर्ट दी इतना ही नहीं और इस बारे में उन्होंने वीचैट एप पर अपने मेडिकल कॉलेज के एल मनी ग्रुप में भी इस वायरस के बारे में जानकारी दि‍ ।

और सभी को अपने जानकारों रिश्तेदारों और अपने दोस्तों को बताने के लिए कहा इस वायरस के बारे में लेकिन कुछ ही घंटों में उनके मैसेज का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया ।

नया साल 2020

2020 में नए साल के जश्न में चीन डूबा हुआ था और ठीक उनकी नाक के नीचे से यह वायरस लगातार फैलता हुआ जा रहा था।

धीरे-धीरे साथ 7 से 14, 14 से 28, 28 से 42 यहां मरीजों की तादाद सैकड़ों पहुंच गई । लेकिन चीन इस वायरस को रोकने की बजाय दुनिया से छुपाने में लगा रहा़ ।

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तारीख 25 जनवरी 2020 को अंग्रेजी नए साल के बाद आया चीनी नया साल अफरा तफरी से बचने के लिए चीन ने  इस जानलेवा वायरस की खबर को सामने तो किया परंतु अंदर ही अंदर चीन के वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी नेशनल बायोसेफ्टी लैब मैं इसकी जांच चलने लगी

वह भी इस लैब में कई सालों से चमगादड़ से फैलने वाली  बीमारियों पर रिसर्च चल रही थी यह रिसर्च इसलिए थी वुहान व आसपास के इलाकों में चमगादड़ ओं की तादाद ज्यादा है

बल्कि यहां चमगादड़ और दूसरे तमाम जानवरों के मांस खाना और सूप पीने का चलन जोरों पर है

अब तक की जांच में यह तो साफ हो रहा था  हो ना हो यह जानलेवा वायरस इन्हीं चमगादड़ से फैला हो

फरवरी के पहले हफ्ते में

डॉक्टर ली व लियांग इस बीच अपने डॉक्टर साथियों व लोगों को आगाह कर रहे थे बल्कि पीड़ितों को आइसोलेशन वार्ड में रखकर वहां पर इलाज भी कर रहे थे

इसी बीच यह खबरें चीन से निकलकर दुनिया भर में फैलने लगी  चीन ने भी अब आखिरकार मान लिया किसके मुल्क को कोरोना नाम के एक महामारी ने जकड़ लिया

वहीं दूसरी तरफ चीनी सरकार ने 34 साल के डॉक्टर ली व लियांग के वायरल हो चुके कोरोना वायरस के आगाह कराने वाले मैैैैैसेज का संज्ञान लेते हुए नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा

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पर डॉक्टर ली की परेशानियां यहां पर खत्म नहीं हुई इसके फौरन बाद उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगा दिया गया और उन्हें लिखित में माफी मांगने पड़ी

इस बीच वुहान व उसके आसपास के इलाकों  के साथ-साथ पूरा चीन इस बीमारी की चपेट में आ चुका था और इस कोरोनावायरस बीमारी की वजह से लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ते जा रहा था

अचानक खबर आई थी कि कोरोनावायरस के बारे में सबसे पहले जानकारी देने वाले डॉक्टर ली की मौत हो चुकी है बताया गया कि डॉक्टर ली 12 जनवरी से अस्पताल में भर्ती थे और 30 जनवरी को पता चला कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं

चीन ने कहा कि उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की गई लेकिन बचाया नहीं जा सका

वुहान सेंटर हॉस्पिटल में अपनी रिपोर्ट मैं कहा कि  डॉक्टर ली की मौत 7 फरवरी की रात 2 बज कर 58 मिनट पर हुई  बताया गया कि उन्हें कफ और बुखार था

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हालांकि सरकार विरोधी गुटों का यह मानना था चीन ने उन्हें इस महामारी का खुलासा करने की सजा दी है

यह खबर इसलिए भी हावी हुई थी क्योंकि शुरुआत में चीन के 20000  कोरोना पीड़ितों को मार देने के अर्जी आई थी

मगर यह दोनों ही खबरें कंफर्म नहीं हो सकी

चीन की सरकारी साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के चीनी वैज्ञानिक बोताओ श्याओं और लि साओ ले दावा किया है कि कोराना वायरस की शुरुआत वुहान के फिस मार्केट से शुरू नहीं हो कर बल्कि यहां से नजदीक बनी 300 गज की सरकारी  रिसर्च लैब से फैली है

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चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि WHDC ने लैब में ऐसे जानवरों को रखा जिनसे यह बीमारियां फैली और इनमें इस बीमारी को फैलाने मैं सबसे बड़े जिम्मेदार उन चमगादड़ को माना जा रहा है जिनकी इस लैब में तादाद 605 यह वायरस उस टेस्टिंग के दौरान फैला जिस समय उन चमगादडो ने एक रिसर्चर पर हमला कर दिया और चमगादड़ का खून उसकी स्कीन में मिल गया जिससे यह वायरस इंसानों में फैलना शुरू हुआ

उसके बाद यह सवाल चीन की नियत पर उठने लगे जब यह वायरस की लैब से बाहर निकलने लगे यह भी हो सकता है कि वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी नेशनल बायोसेफ्टी लैब ने यह वायरस लिक किया हो

जो भी हो यह वायरस कैसे फैला हो इसका अभी तक कोई प्रूफ नहीं है लेकिन इस महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है और कई लोग मर चुके हैं

करीब 60 से ज्यादा देशों में कोरोनावायरस दस्तक दे चुका है जिसमें भारत भी शामिल है

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